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शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2009

राजिया रा दूहा-1

अड़वां खड़वां आथ, सुदतारा विलसै सदा।
सूमां चलै न साथ, राई जितरी, राजिया।।१।।
भावार्थः- (दानशील पुरुषों के पास अरबों-खरबों की संपति होती है। वे उसको संचित कर नही रख सकते जबकि उसका सदउपयोग करते है। अपने व दूसरो के लिए खर्च करते है। दूसरी ऒर कंजूस उसका संचय करके रक्षा करते है न ही स्वयं उपयोग करते है तथा ना ही दूसरों केलिए खर्च करते है। उनके मरने के बाद वो संपति यही पड़ी रहती है साथ में कुछ भी नही आता है)

8 टिप्‍पणियां:

  1. ram ram sa,
    jai rajasthani

    bhot hi suni khechal kari hai. mhare su koi jarurat pade to batajyo sa.

    aapro
    ajay kumar soni
    parlika
    9460102521
    aapnibhasha.blogspot.com

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  2. ram ram sa,
    aapro blog santro hai.
    aap kai dina su koi rachna in blog mathe ni lagai...please kuch or matter site par lagaye.

    aapro
    ajay kumar soni
    parlika
    9460102521

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  3. Ghana choka pan arath Rajasthani maay likho
    jad kaai baat bane.

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  4. MERE MAN KO BAHUT BHAYA. SAJJAN KTMAR BHAT JETPURA,JAIPUR 9783083821

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  5. Bahut achhaa bhai kripaya aur jankariyan MaharanaPratap ke bare me dijiye ASHWIN KATARIYA JAITPURA 9166571471

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